शनिवार, 11 जून 2011

उंगलियाँ थाम के चलना

उंगलियाँ थाम के चलना  मैं भटक जाऊंगा 
तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो थक जाऊंगा |

तुम जो यादों की किताबों के वरक पलटोगे 
एक लम्हे के लिए मैं भी     झलक जाऊंगा

घर भी जाना है कि अब और पिलाओ न मुझे
मैं नशे में हूँ           कहीं और बहक  जाऊंगा |

गम -ज़दा  पलकों में ठहरा हुआ पानी हूँ मैं
मुझको छेड़ोगे तो छूते ही   छलक जाऊंगा |

मैं 'पवन' हूँ  मुझे चन्दन का बदन छूने दो
तेरी खुशबू को लिए     दूर तलक जाउँगा || 

                                      ............पवन श्रीवास्तव



4 टिप्‍पणियां:

  1. मैं 'पवन' हूँ मुझे चन्दन का बदन छूने दो
    तेरी खुशबू को लिए दूर तलक जाउँगा ||

    वाह .....क्या बात है ......
    पर ध्यान रहे चन्दन के बदनों पे कभी कभी सांप भी लिपटे रहते हैं .....

    :))

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  2. chandan vish vyapat nahi, Lipate Rahat Bhujang....Ramesh Kumar Singh

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  3. दर हक़ीक़त मैं किसी ख़्वाब की सच्चाई हूँ /
    ऊँगलियों से न मुझे छू के बिखर जाऊँगा /

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