बुधवार, 6 जुलाई 2011

भोजपुरी ग़ज़ल

सुन्दर के त्यागीं मत 
भोगीं      भागीं मत.

सपना   छितरा  जाई
चिहा के    जागीं मत

दाग त लागिए गइल
धोईं ,       रान्गीं मत
 
आँख  बन्दूक  ना   ह
देखीं        दागीं  मत

जिनिगी       रेशम ह
पेन्हीं        टाँगी मत  

केहू      कुछ दीही ना 
ले   लीं    मांगीं मत  
                           ........पवन श्रीवास्तव
                              

2 टिप्‍पणियां:

  1. आँख बन्दूक ना ह
    देखीं दागीं मत

    केहू कुछ दीही ना
    ले लीं मांगीं मत

    वाह! क्या बात है. भोजपुरी में अच्छी ग़ज़ल कही है आपने

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  2. A Bhai tu Bahoorupiya na tu ta Lakarsunghwa Haw!

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