मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

कल्पना

कल्पना !
अस्वीकार से जनमती है .
अस्वीकार !
ऊर्जा के ऊफान से निकलता है.
ऊर्जा और प्रज्ञा के व्याघात हैं विचार ..........
विचार !
कल्पना नहीं है .
कल्पनाएँ !
आदमी का साथ छोड़ने लगें
तो, प्रलय है.......
फिर महाप्रलय की कल्पना .
फिर नई सृष्टि की कल्पना.......
कल्पना !
तेरे बाँए अनंत अर्ध-विराम हैं.,,,,,,......
तेरे दाएँ कोई पूर्ण-विराम नहीं ...............

                                                     ......पवन श्रीवास्तव

3 टिप्‍पणियां:

  1. कल्पना ना हो तो कुछ भी नहीं ...
    सुन्दर!

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  2. तेरे बाँए अनंत अर्ध-विराम हैं.,,,,,,......
    तेरे दाएँ कोई पूर्ण-विराम नहीं ...............सुन्दर रचना....

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  3. वाणी गीत और सुषमा आहुति !धन्यवाद् !

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