सोमवार, 23 मई 2011

दिन गुजरने का मसला तो हल हो गया 
तुम कथा हो गई मैं   गजल    हो गया 
मैनें रोजी कमाई      न रोजे रखे
देखते-देखते आज  कल हो गया 
एक पल को ठिठक सी गईं पुतलियाँ
कोई ऐसा मेरे साथ      छल हो गया

  इसके पहले कि मेरा    बयां दर्ज हो 
  फैसला भी हुआ और अमल हो गया  
                                            
                                                      .....पवन श्रीवास्तव .      


 

1 टिप्पणी:

  1. इसके पहले कि मेरा बयां दर्ज हो
    फैसला भी हुआ और अमल हो गया

    यही तो न्याय व्यवस्था है. बयां दर्ज होने के पहले ही फैसला सुना दिया जाता है. और लागू भी कर दिया जाता है. अच्छा शेर है. ग़ज़ल मुकम्मल है. बधाई!

    ---देवेंद्र गौतम

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